इंसानियत

छोटी सी चिंगारी से लग जाये आग,

तो मशाल जलाने की जरूररत क्या है,

जब प्यास ही बुझानी हो बस ,

फिर सागर की जरुरत क्या है

और दोस्तों पूछो अपने दिल पर हाथ रख,

अपनी आत्मा से,

बिना इंसानियत के, बस खुद के लिए ही जीना है,

तो इंसान होने की जरुरत क्या है ??????

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Tumhe

मै सोंचता हूँ, की सोंचूं तुम्हे,
पर तू तो सोंच से भी परे है,
तू उड़ गयी पँछियों की तरह कही और,
हम तो आज भी वहीं खड़े हैं !!!!

pyar

बहुत हुआ बेखुदी का आलम ,
तेरे चेहरे का दीदार करने दे ..
कब से बेचैन तू भी है ,
कब से बेचैन मै भी हूँ
या तो कर ले ,तू जी भर ,
या जी भर, मुझे प्यार करने दे!!!!!